दंतेवाड़ा। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट इंजीनियर Aryan Shrivastava (आर्यन श्रीवास्तव) ने अमेरिका में लाखों का पैकेज छोड़ दंतेवाड़ा लौटने का फैसला किया है…

किरंदुल के लाल आर्यन श्रीवास्तव की प्रेरक घर वापसी

Aryan Shrivastava

दंतेवाड़ा। जहाँ आज का युवा विदेश में लाखों-करोड़ों के पैकेज और लग्जरी लाइफस्टाइल के सपने देखता है, वहीं दंतेवाड़ा की माटी में जन्मे आर्यन श्रीवास्तव (Aryan Shrivastava) ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जो पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रेरित कर रही है। अमेरिका की प्रतिष्ठित पर्ड्यू यूनिवर्सिटी (Purdue University) से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वहाँ एक सफल नौकरी कर रहे आर्यन ने अपने सुनहरे भविष्य और उच्च पैकेज को छोड़ दिया। वे छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने और अपनी मातृभूमि का कर्ज चुकाने वापस लौट आए हैं।

किरंदुल की माटी से पर्ड्यू तक का सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि

आर्यन श्रीवास्तव (Aryan Shrivastava) की प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल शहर में ही हुई है। वे एक सुशिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी माता डॉ. खुशबू श्रीवास्तव (उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी, BIOP अस्पताल, किरंदुल) और पिता डॉ. सलिल श्रीवास्तव (मुख्य चिकित्सा अधिकारी, BIOP अस्पताल, किरंदुल) हैं। माता-पिता के सेवा भाव और दंतेवाड़ा की जमीन से जुड़ाव ने आर्यन के संस्कारों की नींव रखी। आर्यन के इस साहसिक और प्रेरणादायी फैसले पर उनके माता-पिता का कहना है कि उन्हें अपने बेटे के इस निर्णय पर बेहद गर्व है।

पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती से आशीर्वाद लेकर शुरू किया सामाजिक कार्य

आर्यन के इस बड़े फैसले के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बुधरी ताती का जीवन और कार्य रहा है। दंतेवाड़ा के आदिवासी और सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य व समाज सेवा के क्षेत्र में डॉ. ताती द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों से प्रेरित होकर आर्यन (Aryan Shrivastava) ने हाल ही में उनके आश्रम पहुंचकर आशीर्वाद लिया और अपने सामाजिक कार्यों की शुरुआत की। आर्यन का मानना है कि जो असली संतोष और वास्तविक बदलाव अपने लोगों के बीच रहकर काम करने में है, वह किसी विदेशी मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी में नहीं मिल सकता।

जमीनी सेवा और सादगी की मिसाल

पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती से आशीर्वाद और रक्षासूत्र लेते आर्यन श्रीवास्तव | nex24.in

अपनी इस यात्रा के दौरान आर्यन (Aryan Shrivastava) ने डॉ. बुधरी ताती के आश्रम में समय बिताया। सामने आई तस्वीरों में पर्ड्यू से पढ़ा यह युवा इंजीनियर सादगी की अनूठी मिसाल पेश करता दिख रहा है:

  • आत्मीयता और रक्षाबंधन का स्नेह: आश्रम पहुंचने पर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने स्वयं आर्यन को स्नेहाशीष देते हुए राखी बांधी। इसके बाद आश्रम के मासूम बच्चों ने भी आर्यन की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा, जिससे माहौल भावुक और उत्सवमय हो गया।
  • संस्कार और आत्मीयता: आश्रम के बच्चों और महिलाओं के साथ आत्मीयता से मिलना, बुजुर्गों से आशीर्वाद लेना और बच्चों के बीच खुशियां बांटना।
  • सादगी: जमीन पर बैठकर सभी के साथ सादा भोजन ग्रहण करना और ग्रामीण जीवन शैली को अपनाना।
  • श्रमदान: आश्रम परिसर में स्वयं झाड़ू लगाकर सफाई में हाथ बंटाना और रसोई के कामों में सहयोग देना।
आश्रम परिसर में झाड़ू लगाकर श्रमदान करते पर्ड्यू इंजीनियर आर्यन श्रीवास्तव - nex24.in


तकनीकी महारत: पर्ड्यू में रचे नए कीर्तिमान

आर्यन (Aryan Shrivastava) का शैक्षणिक और तकनीकी रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है:

  • शिक्षा: पर्ड्यू यूनिवर्सिटी (USA) से B.S. इन कंप्यूटर इंजीनियरिंग (माइनर इन मैथमेटिक्स)।
  • एडवांस्ड प्रोजेक्ट्स: ESP32-आधारित इलेक्ट्रॉनिक चेसबोर्ड ‘ChessMate’ के हार्डवेयर लीड रहे, जिसमें 256 LEDs और 64 सेंसर्स वाला जटिल PCB आर्किटेक्चर विकसित किया।
  • ग्लोबल पार्टनरशिप: पर्ड्यू EPICS और विश्व प्रसिद्ध कंपनी ‘John Deere’ के साथ मिलकर सोलर-पावर्ड बैटरी चार्जिंग स्टेशन के लिए STM32-आधारित एम्बेडेड हार्डवेयर डिजाइन किया।
  • AI और VLSI: Verilog में ASIC/IC डिजाइन और Codenames गेम के लिए जोखिम-रहित AI एजेंट तैयार करने जैसे कई अत्याधुनिक प्रोजेक्ट्स सफलतापूर्वक पूरे किए।

छत्तीसगढ़ को ‘टेक व सेमीकंडक्टर हब’ बनाने का संकल्प

आर्यन (Aryan Shrivastava) की यह वापसी केवल एक भावनात्मक कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस तकनीकी विजन है। वे अपनी तकनीकी विशेषज्ञता (VLSI, PCB डिजाइन और एम्बेडेड सिस्टम्स) के जरिए राज्य में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेक्टर में योगदान देना चाहते हैं, ताकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को राज्य में ही विश्वस्तरीय अवसर मिल सकें।

युवाओं के लिए प्रेरणा

एक तरफ जहाँ ‘ब्रेन ड्रेन’ (प्रतिभा पलायन) देश के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, वहीं दंतेवाड़ा के बेटे आर्यन श्रीवास्तव (Aryan Shrivastava) की यह पहल यह साबित करती है कि यदि मन में अपनी माटी के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो दुनिया की सबसे बेहतरीन शिक्षा और अनुभव का उपयोग अपने क्षेत्र को सशक्त बनाने में किया जा सकता है।



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