जिला अस्पताल दन्तेवाड़ा में 5 महीने में 177 से ज्यादा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सेफ डिलीवरी, कलेक्टर के निर्देश पर अमला मुस्तैद
दन्तेवाड़ा। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश और CMHO डॉ. अजय रामटेके के मार्गदर्शन में जिले में हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, लगातार ट्रैकिंग और सुरक्षित अस्पताल प्रसव पर खास जोर दिया जा रहा है। इसी बेहतर प्लानिंग का नतीजा है कि पिछले 5 महीनों के भीतर जिला अस्पताल दन्तेवाड़ा में 177 से ज्यादा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की बिल्कुल सुरक्षित डिलीवरी कराई जा चुकी है।

पहली तिमाही में ही पहचान, मितानिन और ग्राउंड अमला अलर्ट गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिक्कतों से बचाने के लिए महिलाओं का पहली तिमाही (शुरुआती 3 महीने) में ही पंजीयन कराया जा रहा है। जांच के दौरान खून की कमी (एनीमिया), बीपी, शुगर, कम उम्र में गर्भधारण या पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन जैसी दिक्कतों वाली महिलाओं को ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में रखकर स्पेशल फॉलोअप दिया जा रहा है।
इसके लिए CHO, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और मितानिनों को खास ट्रेनिंग दी गई है। मितानिनें घर-घर जाकर आयरन-कैल्शियम की गोलियां खाने, सही खान-पान और प्रसव से पहले की तैयारियों की सलाह दे रही हैं।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से मिला मजबूत आधार हर महीने की 9 और 24 तारीख को मनाए जाने वाले ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस’ पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से गर्भवती महिलाओं की पूरी जांच कराई जा रही है।

- समय पर रेफरल: जरूरत पड़ने पर महिलाओं को तुरंत बड़े अस्पतालों के लिए रेफर और जरूरी दवाएं दी जा रही हैं।
- एडवांस मैपिंग और गाड़ी की सुविधा: संभावित डिलीवरी डेट से पहले ही महिलाओं को जिला अस्पताल लाने के लिए एम्बुलेंस/परिवहन और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैयार रखी जाती है।
गीदम CHC में सोनोग्राफी सुविधा शुरू
- सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रताप सिंह तोमर: “हाई रिस्क केसों पर सीधी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में बेहतर इलाज तुरंत मिले।”
- CMHO डॉ. अजय रामटेके: “जिले के सभी CHC और PHC में अभियान को प्रभावी बनाया गया है। साथ ही गीदम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अब सोनोग्राफी की सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही जांच आसान हो गई है।
